Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

पूजा में पंचामृत का उपयोग क्यों?

हिंदू धर्म में देवपूजा के बाद पंचामृत यानि तीर्थ ग्रहण करना एक महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।

पंचामृत यानि तीर्थ

पंचामृत यानि तीर्थ

किसी भी हिंदू मंदिर में मंदिर के पुजारी भी वहाँ पर आए भक्तजनों को तीर्थ देते हैं।

हिंदू मंदिर

तीर्थ को लेते समय गोकर्ण मुद्रा करें यानि अंगूठे के पास तर्जनी ऊँगली को थोड़ा सा मोड़कर उसके पृष्ठ भाग पर एक के पीछे एक तीनों उँगलियाँ रखें।

कैसे लें तीर्थ

साधक को तीर्थ हथेली के गहरे हिस्से में लेकर अपने मुँह से आवाज़ न निकालते हुए तीर्थ को ग्रहण करना चाहिए।

ग्रहण करने का तरीका

ग्रहण करने का तरीका

तीर्थ के रूप में लिया जाने वाला उदक या पंचामृत सिर्फ एक ही बूँद लेना चाहिए क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि तीर्थ का रूपांतर लार से होना चाहिए मल से नहीं।

तीर्थ का उपयोग

तीर्थ का उपयोग

सामान्य रूप से घर में पूजा होने के बाद 2 बार तीर्थ ग्रहण करना चाहिए और अगर व्रत हो तो 3 बार तीर्थ ग्रहण करना चाहिए।

कब करें व न करें ग्रहण?

एकादशी के दिन तीर्थ नहीं लेना चाहिए अपितु उसके अगले दिन सूर्योदय के समय तीर्थ लेकर अपने उपवास को पूर्ण करना चाहिए।

एकादशी व्रत के दौरान

हमेशा तीर्थ या पंचामृत के लिए सिर्फ और सिर्फ ताँबे के पात्र का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

तीर्थ का बर्तन

शंखनाद क्यों करना चाहिए?