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हिंदू धर्म में गुरुदक्षिणा की परंपरा क्यों?

गुरु दक्षिणा हिंदू धर्म में एक प्राचीन परंपरा है जो गुरु-शिष्य संबंध का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य गुरु के प्रति आभासी आभिवादन और कृतज्ञता का अभिवादन करना है।

प्राचीन परंपरा

प्राचीन परंपरा

गुरु दक्षिणा गुरु के शिक्षा-दान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।

श्रद्धा और समर्पण

गुरु दक्षिणा एक प्रकार का ऋण चुक्ति होता है जिससे शिष्य अपने गुरु के प्रति ऋणमुक्त होता है।

ऋण चुक्ति

गुरु दक्षिणा देना शिष्य के आभास को और भी मजबूत करता है कि उसने गुरु के उपदेशों को सीधे रूप से अपने जीवन में लागू किया है।

आभास और समर्थन

आभास और समर्थन

गुरु दक्षिणा एक प्रकार का धन्यवाद और स्तुति है जिससे शिष्य अपने गुरु के प्रति आभासी कृतज्ञता व्यक्त करता है।

धन्यवाद और स्तुति

धन्यवाद और स्तुति

गुरु दक्षिणा गुरु के प्रति शिष्य के समर्थन और आदर का प्रतीक है क्योंकि यह शिष्य के लिए गुरु को महत्वपूर्ण बनाए रखता है।

गुरु का सम्मान

गुरु दक्षिणा देना गुरु शिष्य संबंध को मजबूत और दृढ़ बनाए रखने में मदद करता है।

गुरु शिष्य संबंध की दृढ़ता

गुरु दक्षिणा देना शिष्य को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करता है और उसे आत्मा के साथ मिला देता है।

आध्यात्मिक उन्नति

इस प्रकार गुरु दक्षिणा हिंदू धर्म में गुरु के प्रति शिष्य के आभास, कृतज्ञता और समर्थन का सूचक है।

गुरुदक्षिणा

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