Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

स्वस्तिक कल्याण का प्रतिक क्यों?

स्वस्तिक चिन्ह में किसी भी धर्म विशेष की नहीं बल्कि सभी धर्मों एवं समस्त प्राणिमात्र के कल्याण की भावना निहित होती है।

सभी धर्मों में मान्यता

केवल हिंदू धर्म में ही नहीं अपितु विश्व के सारे धर्मों ने इसे परम पवित्र, मंगल करने वाला चिन्ह माना जाता है।

पवित्र और मंगलकारी

प्रत्येक शुभ और कल्याणकारी कार्य में स्वस्तिक का चिन्ह सर्वप्रथम प्रतिष्ठित करने का आदिकाल से ही नियम है।

कल्याणकारी कार्य

गणेश पुराण में कहा गया है कि स्वस्तिक भगवान गणेश जी का ही स्वरुप है।

गणेश पुराण

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मांगलिक कार्यों में स्वस्तिक की स्थापना अनिवार्य होती है।

स्वस्तिक की स्थापना

स्वस्तिक की स्थापना

स्वस्तिक में सभी प्रकार के विघ्नों को हरने और सारे अमंगल दूर करने की शक्ति निहित होती है।

विघ्न और अमंगल

आदिकाल से लेकर वर्तमान तक जो भी स्वस्तिक की प्रतिष्ठा किए बिना मांगलिक कार्य करता है वह कभी भी निर्विघ्न सफल नहीं होता है।

स्वस्तिक की प्रतिष्ठा

हमारे द्वारा बताए गए कारणों के मुताबिक किसी भी मांगलिक कार्य के शुभारंभ से पहले स्वस्तिक चिन्ह बनाकर शुभ कार्य का विधान है।

शुभ कार्य का विधान

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