Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है।

प्राण-प्रतिष्ठा

देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा मंदिरों में करना एक बहुत ही महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।

अनुष्ठान

मंदिरों में देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा का अर्थ है - जीवन शक्ति की स्थापना या देवी-देवता को जीवन में लाना।

अर्थ

प्राण-प्रतिष्ठा में मंत्र उच्चारण और भजन का पाठ करके मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों को पहली बार स्थापित किया जाता है।

मूर्ति स्थापना

आइए आज हम आपको बताते हैं कि मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों में प्राण-प्रतिष्ठा क्यों की जाती है?

प्राण-प्रतिष्ठा क्यों?

प्राण-प्रतिष्ठा क्यों?

हिंदू धर्म में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मूर्ति को निर्जीव माना जाता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति में शक्तियों का संचार होने लगता है।

मूर्ति में शक्ति

हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ही मंदिरों में भगवान की मूर्ति को स्थापित करना चाहिए।

मंदिर में मूर्तियाँ

लोक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

मनोकामना पूर्ति

मंदिरों में स्थित देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा अर्चना करने से भय से मुक्ति मिलती है तथा कष्टों का निवारण होता है।

भय से मुक्ति

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