नमस्कार क्यों करना चाहिए?

Deepak Kumar Saini B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

विविध धर्मों में सत्पुरषों, बुजुर्गों और परमात्मा को नमस्कार करने के विषय में अनेक संकेत, प्रथाएँ और रूढ़ियाँ आज भी अस्तित्व में हैं।

ज्येष्ठ तथा श्रेष्ठ व्यक्ति आशीर्वाद देते समय अपना हाथ प्यार व्यक्त करते हुए अपने से छोटों के मस्तक व पीठ पर रखते हैं।

ऐसे ही रास्ते में नेत्र संकेत से अथवा हाथ जोड़कर नमस्कार करना उचित रहता है इसलिए दोनों जगह मस्तक झुकना महत्वपूर्ण है।

मस्तक झुकाने से नमस्कार करने वाले व्यक्ति की नर्मता व्यक्त होती है।

नमस्कार को स्वीकार करते समय भी मस्तक झुकाया जाता है परंतु यह नमस्कार स्वीकारने का लक्षण है।

बुजुर्गों को झुककर नमस्कार करने की बहुत पुरानी परंपरा है तथा इसमें भी आदर व्यक्त करने के लिए चरणों पर मस्तक रखकर अभिवादन करना चाहिए।

यदि नमस्कार करने में शर्म महसूस हो तो झुकने और हाथ से चरण स्पर्श करने का अभिनय करें इससे दूसरों की भावनाओं की कद्र होती है।

प्रत्येक व्यक्ति में स्वयं ईश्वर का निवास होता है क्योंकि हर व्यक्ति की आत्मा ईश्वर की ही अंश है।

जब हम नमस्कार करने के लिए झुकते हैं तब परिणाम स्वरूप हम भगवान को भी शीश झुकाते हैं इस प्रकार झुककर नमस्कार करने की भूमिकाएँ आज भी समाज में दिखाई देती हैं।

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