Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

दोस्तों आज हम आपको बताएँगे कि हम सब महाशिवरात्रि का पर्व इतने धूम-धाम और श्रद्धा-पूर्वक क्यों मनाते हैं?

 महाशिवरात्रि का पर्व

 महाशिवरात्रि का पर्व

प्रजापति दक्ष महादेव को ईश्वर के रूप में स्वीकार नहीं किया करते थे और चन्द्रमा प्रजापति दक्ष के दामाद भी थे।

 प्रजापति दक्ष

 प्रजापति दक्ष

एक दिन चन्द्रमा ने महादेव की महिमा सबको सुनाई थी और यह बात प्रजापति दक्ष को अच्छी नहीं लगी थी तो उन्होंने चन्द्रमा को हमेशा के लिए पत्थर का बन जाने का श्राप दिया था।

 चन्द्रमा को श्राप

 चन्द्रमा को श्राप

प्रजापति दक्ष द्वारा चन्द्रमा को श्राप देने के बाद प्रजापति दक्ष ने चन्द्रमा के स्थान पर एक नए ग्रह का निर्माण करने की कोशिश की थी।

 नए ग्रह का निर्माण

 नए ग्रह का निर्माण

उधर चन्द्रमा धीरे-धीरे पत्थर के बन रहे थे तब माता सती ने अपनी बहनों का सुहाग बचाने के लिए ऋषि मार्कंड़य से महा मृत्युजंय मंत्र का ज्ञान प्राप्त किया था।

 बहनों का सुहाग

 बहनों का सुहाग

महा मृत्युजंय मंत्र का जाप माता सती और समस्त शिव भक्तों द्वारा चन्द्रमा को बचाने के लिए जब किया तो महादेव चन्द्रमा की सहायता करने आए।

 महा मृत्युजंय मंत्र

 महा मृत्युजंय मंत्र

चन्द्रमा को पत्थर का बनने से बचाने के लिए भगवान शिव जी ने चन्द्रमा को अपने शीश पर धारण कर लिया जिससे प्रजापति दक्ष के श्राप का प्रभाव कम हो सके।

 शीश पर धारण

 शीश पर धारण

महादेव की यह महिमा देख कर समस्त भक्तों और देवताओं ने महादेव की चन्द्रमा धारण किए हुए स्वरुप की पूजा की और भगवान विष्णु जी ने उस दिन को महाशिवरात्रि का नाम दिया।

 महादेव की पूजा

 महादेव की पूजा

तब महादेव महाशिवरात्रि के दिन स्वयं महाशिवरात्रि का व्रत रखने की घोषणा समस्त संसार की समक्ष की तथा इसी कथा के आधार पर आज हम सभी महाशिवरात्रि का पर्व मनाते आ रहे हैं।

महाशिवरात्रि की कथा

महाशिवरात्रि के व्रत में ध्यान रखें ये बातें