Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

सवेरे और शाम की पूजा के नियम

हिंदू धर्म के अनुयायी मुख्य रूप से प्रातः काल और संध्या काल के समय भगवान की पूजा अर्चना करते हैं।

भगवान की पूजा का जितनी सुबह के समय महत्वपूर्ण है उतनी ही महत्वपूर्ण शाम की समय में होती है।

भगवान की पूजा सुबह और शाम में अलग-अलग नियमों को ध्यान में रख कर करनी चाहिए आइए आज हम आपको बताते हैं कि सुबह-शाम की पूजा के नियम क्या होते हैं?

सुबह और शाम की पूजा में घंटी बजाने से सकारात्मकता आती है और इसलिए ही पूजा में घंटी बजाना शुभ माना जाता है।

सुबह की पूजा में शंख बजाना बहुत शुभ माना जाता है और शाम की पूजा में शंख बजाना वर्जित होता है।

दिन की पूजा के बाद कपाट या पर्दा करना ज़रूरी नहीं होता है लेकिन शाम की पूजा के बाद पूजा स्थल के कपाट या पर्दा करना बहुत ज़रूरी होता है।

शाम की पूजा करने के बाद जब दीपक की ज्योति शांत हो जाती है तो पूजा स्थान पर अर्पित किए गए फूल, माला और भोग को हटा लेना चाहिए।

शाम की पूजा करके पूजा स्थल के कपाट बंद व पर्दा लगाने के बाद सुबह ही कपाट खोलने व पर्दा हटाना चाहिए।

सुबह की पूजा में गायत्री मंत्र का उच्चारण ज़रूर करना चाहिए वहीँ सूर्यास्त के बाद गायत्री मंत्र का उच्चारण नहीं करना चाहिए।

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