भगवान शिव जी का डमरू और त्रिशूल किसका प्रतिक हैं?

Deepak Kumar Saini B.E. (Civil) Vastu & Geopathy Expert

दोस्तों आपने हमेशा भगवान शिव जी के हाथों में डमरू व त्रिशूल ज़रूर देखा होगा चलिए आज हम आपको बताते हैं कि डमरू और त्रिशूल किसके प्रतिक माने जाते हैं।

भगवान शिव जी अपने माथे पर त्रिपुंड, हाथ में डमरू व त्रिशूल, जटाओं में गंगा और चंद्रमा और गले में नाग धारण किए हुए हैं।

भगवान शिव जी

आज हम आपको बताएँगे कि भगवान भोलेनाथ के डमरू और त्रिशूल किस चीज़ के प्रतिक माने जाते हैं।

धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव जी जब भी तांडव करते हैं या प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं तो साथ ही वे डमरू भी बजाते हैं।

डमरू

डमरू का आकार रेत की घड़ी जैसा है जो दिन और रात के संतुलन का प्रतिक माना जाता है।

डमरू का प्रतिक

पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के आरम्भ से जब भगवान शिव जी प्रकट हुए थे तो उनके साथ रज, तम और सत गुण भी प्रकट हुए थे।

त्रिशूल

रज, तम और सत गुणों के सामंजस्य के बिना सृष्टि का सही संतुलन नहीं था इसी वजह से तीनों गुणों को शिव जी ने त्रिशूल के रूप में धारण किया।

सृष्टि का संचालन

भगवान शिव जी के त्रिशूल के तीनों शूलों को रज, तम और सत इसलिए ही कहा जाता है।

त्रिशूल किसका प्रतिक

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