खड़े होकर या बैठकर कैसे करें पूजा?

पूजा कक्ष या मंदिर

पूजा कक्ष या मंदिर

दोस्तों आज हम आपको बताएँगे कि हमें अपने परिसर के पूजा कक्ष या मंदिर में खड़े हो कर या बैठ कर पूजा करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए?

नियमों का पालन

नियमों का पालन

हिंदू धर्म में पूजा करने के कई नियम हैं और अगर पूजा करते समय नियमों का पालन न किया जाए तो पूजा हमेशा अधूरी मानी जाती है।

शास्त्रीय नियम

शास्त्रीय नियम

हिंदू ग्रंथों के मुताबिक पूजा करने के कई शास्त्रीय नियम हैं जिसका पालन पूजा करते समय हर व्यक्ति को ज़रूर करना चाहिए।

पूजा के परिणाम

पूजा के परिणाम

हिंदू मान्यताओं के अनुसार खड़े हो कर तथा बैठ कर पूजा करने के अपने-अपने परिणाम हैं।

भगवान का स्थान

भगवान का स्थान

वास्तु शास्त्र के तहत किसी भी परिसर के पूजा कक्ष या मंदिर में भगवान की मूर्तियों और तस्वीरों का स्थान हमेशा पूजा करने वाले व्यक्ति से थोड़ा ऊँचा होना चाहिए।

पूजा करने वाला व्यक्ति

वास्तु शस्त्र के हिसाब से किसी भी परिसर के पूजा कक्ष या मंदिर में भगवान की मूर्तियों और तस्वीरों का स्थान हमेशा पूजा करने वाले व्यक्ति से कभी भी नीचे नहीं होना चाहिए।

बैठकर पूजा

बैठकर पूजा

हिंदू कथाओं के तहत बैठकर हवन, यज्ञ तथा शुभ कार्य किए जाते हैं इसलिए बैठकर पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है।

खड़े होकर पूजा

खड़े होकर पूजा

लोक कथाओं के अनुसार आजकल के दौर में खड़े हो कर पूजा करने का प्रचलन है जो कि बिलकुल भी उचित नहीं होता है।

कोशिश करें

कोशिश करें

अगर आप खड़े हो कर पूजा करते हैं तो कोशिश करें कि खड़े हो कर पूजा न करें तथा अगर संभव हो तो बैठकर ही पूजा करने का प्रयास करें।

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