Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

कैसे शुरू हुई होलिका दहन की प्रथा

दोस्तों आज हम आपको बताएँगे कि हम सभी अपने देश में होलिका दहन करने की प्रथा को आज तक क्यों मानते हुए आ रहे हैं?

होलिका दहन प्रथा

राक्षस हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था तथा वहीं हिरण्यकश्यप भगवान नारायण को अपना घोर शत्रु मानता था।

हिरण्यकश्यप

हिरण्यकश्यप

हिरण्यकश्यप यानि प्रह्लाद के पिता के लाख मना करने के बावजूद पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु जी की भक्ति करता रहता था।

विष्णु की भक्ति

विष्णु की भक्ति

असुराधिपति हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने की कोशिश की लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ।

प्रह्लाद को मारने की कोशिश

लाखों बार हिरण्यकश्यप ने जब अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने की कोशिश की पर वो नाकाम रहा ऐसे में उसने अपनी बहन होलिका से मदद माँगी।

होलिका से मदद

हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान मिला था कि उसे अग्नि नहीं जला सकती थी।

होलिका का वरदान

होलिका अपने भाई हिरण्यकश्यप से कहा कि वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि की चिता पर बैठेगी और उसके हृदय के काँटे को निकाल देगी।

अग्नि की चिता

अग्नि की चिता

होलिका प्रह्लाद को लेकर जैसे ही चिता पर बैठी तभी भगवान विष्णु की ऐसी माया हुई जिसमें होलिका जल गई जबकि प्रह्लाद को हल्की सी आंच भी नहीं आई।

विष्णु की माया

होलिका दहन से पहले कच्चा सूत क्यों लपेटा जाता है?