Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

भगवान की आरती करने की सही प्रक्रिया

हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी-देवताओं की मूर्ति व तस्वीरों की आरती करने के कुछ विशेष नियम हैं जिनका पालन करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

हिंदू ग्रंथों के मुताबिक भगवान की पूजा बिना आरती के संपूर्ण नहीं मानी जाती है तथा बिना आरती के पूजा करने से कभी भी किसी भी फल की प्राप्ति नहीं होती है।

आइए आज हम आपको बताते हैं कि भगवान की आरती करते समय नियमित रूप से किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए?

भगवान की आरती करते समय चाहे स्त्री हो या पुरुष अपने दाएँ हाथ में दीपक या आरती की थाली को पकड़ना चाहिए।

भगवान की आरती करते समय हमेशा अपना मुख भगवान की तरफ अर्थात उत्तर से लेकर पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए।

आरती की थाली को घड़ी की दिशा (Clockwise) में घुमाना चाहिए तथा घड़ी की उलटी दिशा (Anti-Clockwise) में नहीं घुमाना चाहिए।

आरती की थाल को घड़ी की सही दिशा में घुमाते हुए ॐ आकार बनाते हुए भगवान की आरती करनी चाहिए।

आरती की शुरुआत में भगवान के चरणों की 4 बार आरती की थाली घुमाकर आरती उतारनी चाहिए।

भगवान के चरणों की आरती के बाद 2 बार नाभि और आखिरी में एक बार मुख की आरती उतारनी चाहिए तथा इस प्रक्रिया को 7 बार करना चाहिए।

भगवान की आरती के दौरान घंटी व शंखनाद ज़रूर करना चाहिए या आरती पूर्ण होने के बाद शंखनाद करना चाहिए।

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