Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने के लाभ

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन पूरे दिन पतंग उड़ाने से क्या लाभ होता है?

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति

हमारे पूर्वजों व बुजुर्गों के द्वारा बनाए गए नियम व रिवाज सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक तौर-तरीकों से भी सिद्ध हैं।

पूर्वज व बुजुर्ग

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल ही ऐसे त्यौहार हैं जो हर साल 13, 14 और 15 जनवरी की तिथि को पड़ते हैं।

13, 14 और 15 जनवरी

दरअसल लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल ये तीनों ही त्यौहार एक ही त्यौहार हैं जिन्हें समस्त भारत में अलग तिथियों पर व भिन्न-भिन्न लोगों द्वारा मनाया जाता है।

लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल

लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं जिसे समस्त भारत में विभिन्न त्योहारों के रूप में मनाया जाता है।

सूर्य उत्तरायण

सूर्य उत्तरायण

भारत के उत्तरी में लोहड़ी, मध्य में मकर संक्रांति व दक्षिणी क्षेत्र में पोंगल के नाम से जाना जाता है।

भारत के विभिन्न क्षेत्र

मकर संक्रांति के समय सूर्य की किरणों में गर्माहट कम होती है जिससे हमें ठंड का एहसास होता है।

गर्माहट कम

सूर्य की किरणों में Ultra Voilet किरणें होती हैं जो हमारे मानव शरीर के लिए अत्यंत ही लाभकारी होती है।

Ultra Voilet किरणें

इसलिए ही मकर संक्रांति के दिन पूरे दिन पतंग उड़ाने का रिवाज है ताकि हमारे शरीर का संपर्क उस दिन सूर्य में स्थित Ultra Voilet किरणों के साथ लंबे समय तक होता रहे।

पतंग उड़ाने का रिवाज

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