Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

दुल्हन चावल के कलश को पैर से क्यों गिराती है?

Dulhan Chawal Ke Kalash Ko Paer Se Kyon Girati Hai?

हमारे सनातन धर्म में विवाह 4 महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है।

हिंदू विवाह में कई तरह के रीति रिवाज़ और रस्में होती हैं और कुछ रस्में विवाह के पहले, दौरान व बाद में की जाती हैं।

हिंदू विवाह की अनेकों रस्मों में एक है जब नई-नवेली दुल्हन ग्रह प्रवेश के दौरान अपने ससुराल में पैर से चावल से भरे कलश को गिराती है।

आज आपके वास्तु सलाहकार दीपक कुमार सैनी आपको इस रस्म के पीछे का कारण समझाएँगे।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार चावलों को पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि चावल को स्थिरता का प्रतिक माना जाता है।

वहीँ हिंदू धर्म में घर आई नई-नवेली दुल्हन को हमेशा ही लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।

नई दुल्हन द्वारा ग्रह प्रवेश के दौरान पैर से चावल के कलश को इसलिए गिराया जाता है ताकि ससुराल में लक्ष्मी हमेशा स्थिर रहे।

जब नई दुल्हन कलश को पैर से गिराती है और चावल कलश से चारों तरफ फ़ैल जाते हैं तो माना जाता है कि सुख-समृद्धि भी घर में चारों तरफ फैलती है।

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