Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

भैमी एकादशी के व्रत के लाभ

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन को ही भैमी एकादशी कहा जाता है।

हिंदू पंचांग

हिंदू पंचांग

ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक 2024 के फ़रवरी महीने की 20 तारीख मंगलवार को भैमी एकादशी मनाई जाएगी।

ग्रेगोरियन कैलेंडर

ग्रेगोरियन कैलेंडर

भैमी एकादशी को जया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है तथा इसे पाप से मुक्ति और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति के विश्वास के साथ मनाया जाता है।

जया एकादशी

जो व्यक्ति भैमी एकादशी के पवित्र दिन पर उपवास रखते हैं उन्हें भूत-प्रेत के महान बोझ से छुटकारा मिलता है।

बोझ से छुटकारा

भैमी एकादशी का व्रत रखने से मनुष्यों को वास्तव में जन्म और मृत्यु से मुक्ति मिलती है।

मुक्ति

हिंदू मान्यताओं के अनुसार भैमी एकादशी का व्रत रखने का अर्थ होता है अपने लिए मोक्ष के द्वारों को खोल देना।

मोक्ष के द्वार

मोक्ष के द्वार

भैमी एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले लोगों को दशमी तिथि के दिन से कुछ जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए।

जरूरी नियमों का पालन

दशमी के दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज़, दाल (मसूर की) और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

खाद्य-पदार्थों का सेवन

रात के समय भोग-विलास से दूर रहते हुए पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए उसके बाद भैमी एकादशी के व्रत का आरंभ करना चाहिए।

ब्रह्मचर्य का पालन

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