Deepak Kumar Saini - B.E. (Civil) - Vastu & Geopathy Expert

हिंदू धर्म के 4 वेदों के नाम

'वेद' शब्द संस्कृत भाषा के विद् धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना अतः वेद का शाब्दिक अर्थ है 'ज्ञान'।

आज 'चतुर्वेद' के रूप में ज्ञात इन 4 ग्रंथों का विवरण कुछ इस प्रकार है।

ऋग्वेद - सबसे प्राचीन तथा प्रथम वेद जिसमें मंत्रों की संख्या 10462,मंडल की संख्या 10, तथा सूक्त की संख्या 1028 है तथा ऐसा भी माना जाता है कि ऋग्वेद में सभी मंत्रों के अक्षरों की कुल संख्या 432000 है और ऋग्वेद का मूल विषय ज्ञान है व विभिन्न देवताओं के वर्णन के साथ-साथ ईश्वर की स्तुति भी सम्मिलित है।

यजुर्वेद - यजुर्वेद कार्य (क्रिया) व यज्ञ (समर्पण) की प्रक्रिया के लिये 1975 गद्यात्मक मंत्र है।

सामवेद - सामवेद का प्रमुख विषय उपासना है और संगीत में लगे सुर को गाने के लिये 1875 संगीतमय मंत्र भी हैं।

अथर्ववेद - अथर्ववेद में गुण, धर्म, आरोग्य एवं यज्ञ के लिए 5977 कवितामयी मंत्र हैं।

वेद प्राचीन भारत वर्ष के पवित्र साहित्य हैं जो धरती के प्राचीनतम सनातन हिंदुओं के प्राचीनतम और आधार भूत धर्मग्रन्थ भी हैं।

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